Skip to content1. इस्लाम का मूल सिद्धांत
- इस्लाम कहता है कि अल्लाह ने पूरी कायनात बनाई है।
- वह शक्ति निराकार है, जिसका कोई रूप या आकार नहीं।
- हर तिनका, हर कण उसी शक्ति से उत्पन्न हुआ है।
2. संकीर्ण सोच और उसका परिणाम
- कुछ लोग मानते हैं कि केवल उनका धर्म ही अल्लाह की इबादत करता है।
- उनका तर्क है कि इंसान भगवान नहीं हो सकते, केवल पैग़म्बर या मैसेंजर ऑफ गॉड हो सकते हैं।
- इस सोच से यह निष्कर्ष निकाला जाता है कि बाकी धर्मों के लोग “काफ़िर” हैं।
- इसी विचारधारा ने सदियों से जिहाद के नाम पर मासूमों की जान ली है।
3. व्यापक दृष्टिकोण
- अगर अल्लाह ने पूरी कायनात बनाई है, तो उसने हिंदुस्तान, अमेरिका, यूरोप, रूस, चीन सब बनाए।
- उसने हिंदू, ईसाई, यहूदी और अन्य धर्मों के लोग भी बनाए।
- अलग‑अलग सभ्यताएँ, भाषाएँ और संस्कृतियाँ भी उसी शक्ति की रचना हैं।
- इसलिए अल्लाह सिर्फ मुसलमानों का नहीं, बल्कि सबका है।
4. पाकिस्तान और कश्मीर का भ्रम
- पाकिस्तान का निर्माण 1947 में हुआ, यानी केवल लगभग 80 साल पहले।
- जबकि अल्लाह ने कायनात करोड़ों साल पहले बनाई।
- क्या अल्लाह किसी छोटे से मुल्क या क्षेत्र में सीमित हो सकता है?
- सच्चाई यह है कि अल्लाह हर जगह है — हिंदुस्तान में भी, पाकिस्तान में भी, यूरोप में भी, और पूरी कायनात के जर्रे‑जर्रे में।
5. निष्कर्ष
- जितना अल्लाह मुसलमानों का है, उतना ही हिंदुओं, ईसाइयों और यहूदियों का भी है।
- जिहाद और धर्म के नाम पर हिंसा करना गलत है।
- असली इबादत यह है कि हम समझें: अल्लाह सबका है, सबमें है, और सबके लिए है।